हिंदी विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर सम्मान समारोह का आयोजन

By : Sumit
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर में हिंदी विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह की छवि।
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अमृतसर, 24 फरवरी 2025 – गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाते हुए विभाग के डीन, भाषा एवं प्रमुख प्रोफेसर सुनील कुमार ने इस अवसर पर सभी को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि किसी भाषा या बोली का लुप्त हो जाना केवल उस भाषा का नहीं बल्कि उस समाज और संस्कृति के विलुप्त होने का संकेत है। वर्तमान समय में विश्वभर में कई भाषाएँ और बोलियाँ संकटग्रस्त हैं, जिन्हें संरक्षित करने की आवश्यकता है। उन्होंने इस दिशा में भाषा संरक्षण और उसके अधिकाधिक प्रयोग पर बल दिया। साथ ही, उन्होंने भविष्य में हिंदी भाषा संरक्षण और उसके महत्व को समझने और उसे बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया।

इस अवसर पर बैंक ऑफ बड़ौदा, क्षेत्रीय कार्यालय, अमृतसर द्वारा मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह के अंतर्गत हिंदी विभाग की दो छात्राओं सुश्री सुनीता मिश्रा और सुश्री लच्छमी मौर्य को प्रमाण पत्र और धनराशि से सम्मानित किया गया। समारोह में बैंक ऑफ बड़ौदा, क्षेत्रीय कार्यालय, अमृतसर की राजभाषा अधिकारी श्रीमती नीलम, श्री कुलदीप कुमार सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

प्रो. सुनील कुमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) करमजीत सिंह के कुशल नेतृत्व और प्रेरणा से हिंदी विभाग लगातार विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि मातृभाषा संरक्षण और संवर्धन केवल भाषाविदों की ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसमें योगदान देना चाहिए। उन्होंने छात्रों को अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व करने और उसे प्रोत्साहित करने की प्रेरणा दी।

समारोह में हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सपना शर्मा ने मातृभाषा संरक्षण के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि मातृभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि यह हमारी संस्कृति और पहचान का अभिन्न अंग होती है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा के संरक्षण से ही किसी राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखा जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि हिंदी भाषा आज केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्व के विभिन्न देशों में भी इसे अपनाया जा रहा है।

इस अवसर पर विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. लवलीन कौर ने अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की महत्ता पर विचार रखते हुए कहा कि विभिन्न भाषाओं का अस्तित्व उनकी व्यापकता और उपयोगिता पर निर्भर करता है। उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया कि भाषा केवल संचार का साधन नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है।

हिंदी विभाग की प्राध्यापक पिंकी शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भाषा केवल शब्दों का समूह नहीं होती, बल्कि यह एक समाज और उसकी सोच को प्रतिबिंबित करती है। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा संरक्षण की उन्नति से ही समाज की उन्नति संभव है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे हिंदी भाषा का अधिकाधिक प्रयोग करें और इसे प्रोत्साहित करें।

विदेशी भाषाओं के विभाग से मैडम सुनैना और मैडम रमनदीप कौर भी इस अवसर पर उपस्थित रहीं। उन्होंने भी इस महत्वपूर्ण दिवस पर अपने विचार साझा किए और मातृभाषा संरक्षण की दिशा में किए जाने वाले प्रयासों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा की महत्ता उसके उपयोग और समाज में उसकी स्थिति पर निर्भर करती है। इसलिए यह आवश्यक है कि हम अपनी मातृभाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत रहें।

इस समारोह में विभाग के शोधार्थी और अनेक छात्र-छात्राएँ भी उपस्थित रहे। इस दौरान छात्रों ने भी हिंदी भाषा संरक्षण पर अपने विचार साझा किए और इसके महत्व पर प्रकाश डाला। छात्रों ने हिंदी भाषा को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए अपने सुझाव भी दिए।

अंत में, प्रो. सुनील कुमार ने सभी उपस्थित जनों का धन्यवाद किया और यह आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से मातृभाषा संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे हिंदी भाषा का सम्मान करें और इसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में अपना योगदान दें।

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